Posts

समीक्षा: ऐसी वैसी औरत

Image
ऐसी वैसी औरत (कथा-संग्रह) [ अंकिता जैन ]                      समीक्षा:          ' ऐसी वैसी औरत ' हर उस आभासी आयाम को परिभाषित करती है, जहाँ औरतों और ' केवल औरतों ' को दोषी ठहराया जाता गया है। समाज के कुछ थोथे से पैमाने होते हैं, जो तथाकथित सभ्य समाज के द्वारा निर्धारित किए जाते हैं, जिनके आधार पर किसी को सही या फिर गलत ठहराया जाता है। यह पैमाना औरतों के लिए विशेष रूप से ज्यादा ही निष्ठुर हो जाता है।  PC- google ; writer Ankita Jain              यह किताब उन्हीं पैमानों के आधार घृणित औरतों के अलग-अलग वर्गों को उकेरती है। चाहे एक अधेर विधवा 'मालिन भौजी' का पुनर्विवाह हो अथवा ससुराल से परित्यक्त एवं मायके में तिरस्कृत 'रज्जो' हो, चाहे घर पर निर्दयी पिता के डर से भागी दलाल के हत्थे चढ़ वेश्यावृत्ति में उतरने को मजबूर हुई 'इरम' हो अथवा समलैंगिक होने के चलते उपहास एवं घृणा का पात्र बनी 'शैली' हो, चाहे श्वसुर की वासना एवं...

सांगठनिक जीवन

Image
               ★ सांगठनिक जीवन ★         आप और हम एक सभ्य समाज के बाशिंदे हैं। सभ्यता एवं संस्कार हमारी पहचान है। हम कुछ कार्य कर रहे हों अथवा आप कुछ कार्य कर रहे हों, गलती होने की गुंजाइश होती है। एक संगठन कुछ विशेष नहीं वरन् समाज का ही प्रतिबिंब होता है। जैसे समाज में अच्छे लोग भी हैं और बुरे लोग भी हैं, ठीक उसी तरह किसी संगठन में भी कुछ बुरे लोग अवश्य होते हैं। आवश्यक नहीं है कि वह बुरे खुले में अपनी बुराईयाँ मुँह पर चिपकाए घूमते रहें और न ही एक सामाजिक संगठन RAW, CIA अथवा KGB इतना सामर्थ्यवान होता है कि हर शामिल होने वाले व्यक्ति की पूरी जानकारी प्राप्त कर पाए। हाँ उस व्यक्ति की बुराई पता चलने के बाद संगठन की उसके प्रति क्या प्रतिक्रिया होती है, यही संगठन का चरित्र होता है। अगर उस पर तुरंत कारवाई की जाए, उसे संगठन से निष्कासित किया जाए तो इसका अर्थ होता है कि संगठन ने उस व्यक्ति से असहमति जताई है। संगठन का उन कार्यों में कोई संलिप्तता नहीं है। लेकिन अगर संगठन इन बातों के ...

कुछ अनकहे से अल्फाज

                      कुछ अनकहे से अल्फाज Dear Crush                  डेढ़ साल तक मैं तुम्हें क्लास में देखता रहा परन्तु नाम तक नहीं पूछ सका। ऐसा नहीं है कि मैं पुराने खयालातों का था जिसे लड़कियों से बात करने में डर अथवा झिझक होती है। मैं फट्टू या डरपोक भी नहीं था। बात करने के तौर तरीकों में भी माहिर था [और हूँ भी] । सामने वाले पर अपना प्रभाव छोड़ना भी अच्छे से आता था। पर वहाँ का माहौल थोड़ा अलग था। वह नसीब सर की क्लास थी, जहाँ लड़कियाँ पीरियड के दौरान केवल सर से ही बात करती थी। पीरियड टाईम से पहले आना मेरे लिए संभव नहीं था। हरीन्द्र सर के पास 7-9 बजे सुबह क्लास करके निकलने के बाद दौड़ते आने के बाद ही नसीब सर के 9-10 बजे सुबह वाले बैच में घुस पाता था। नसीब सर की बहुत थोड़ी बुरी आदतों में से एक थी कि वे दूसरा अवसर किसी को नहीं देते थे। एक बार उनकी नजरों से कोई गिर गया तो दूजी बार खड़े होने का लाख प्रयास कर ले वे व्यंगबाणों से पुनः गिरा दिया करते थे। एक लड़क...

लंबी मुलाकात

Image
#यादों_में_बकथेथररी                       ★ लंबी मुलाकात ★              मैं उससे गुस्सा था या वह मुझसे गुस्सा थी या फिर आपसी झगड़ा था या फिर आपसी सहमति थी लेकिन जो भी हो बात यह थी कि कुछ दिनों से हमारी बातें नहीं हो रही थी। आज अचानक से उसका मैसेज आया, "कहाँ हो।" मैंने जबाब दिया,"बी एन कॉलेज के पास आया हूँ।" उसने बताया कि वह PMCH आ रही थी। फिर वह बी एन कॉलेज (जो कि PMCH से पहले ही है) के पास ही ऑटो से उतर गई। मेरा भी काम हो गया था और मुझे भी PMCH के पास से ही ऑटो P.C- Google  पकड़नी थी। तो फिर हम दोनों पैदल ही वहाँ के लिए निकले। रास्ते में इधर-उधर की बातें हो रही थीं। उसकी बातों से जाहिर था कि आज वह थोड़ा पहले ही निकल गई थी तो मैं थोड़ी देर कहीं रूक कर बात कर सकता था लेकिन मुझे पूछना अच्छा नहीं लगा। इन्हीं बातों के दौरान उसने बताया, "मेरी सगाई हो गई है लेकिन आज सगाई वाली अँगूठी नहीं पहनी है।" मैंने हँसकर टाला तो वह सुबूत के तौर पर चूड़ियाँ दिखाने लगी। फिर म...

नीतीश कुमार

Image
#बिहार_में_बहार_है_नीतीश_का_गुंडाराज_है                           ★ नीतीश कुमार ★             नीतीश कुमार बिहार के मुखमंडल पर पड़ा हुआ वह पंद्रह साल पुराना कचड़ा है, जिसकी दुर्गंध से आने वाली कितनी ही सामाजिक एवं राजनैतिक पीढ़ियाँ उल्टी करते हुए, बीमार होती रहेंगी। इन्होंने शिक्षा व्यवस्था को गर्त की उस खाई में ढ़केला है, जहाँ से इसे उठा कर धरा पर रखने में आने वाली सुलझी तथा ईमानदार सरकारों को भी  अपने पूरे कार्यकाल का बलिदान देना होगा। क्योंकि शिक्षा के पूरे तंत्र को कंकाल तंत्र बना छोड़ा है इस स्वघोषित सुशासन बाबू ने। आज हमें आवश्यकता है शिक्षा में प्रचुर निवेश करने की, इससे विकास दर में भी बहुत अधिक ह्रास आएगा। तत्कालीन सरकार की चहुँओर थू थू होगी। पूर्णबहुमत वाली सरकार तो पाँच साल टिक भी जाए लेकिन अल्पबहुमत अथवा अर्दधबहुमत वाली सरकार तो कार्यकाल से पहले ही धराशायी हो जाएगी। तो इस आत्मघाती कदम को उ...

ख्वाबों में मुलाकातें

                      ★ ख्वाब में मुलाकातें ★         आज पता नहीं कैसे पर दो लोगों से अचानक मुलाकात हो गई।         एक तो अजय देवगन से जो सड़क किनारे यूं ही खड़े थे थोड़ी बहुत हाय हेल्लो हुई, फिर मैंने पूछ दिया कि इधर कैसे तो उन्होंने कहा कि पटना में खुद के कुछ पुकारकेन्द्र (कॉल सेंटर) हैं। शनिवार को चला आता हूँ हिसाब किताब करने।       और दूसरी उनसे भी भयंकर हस्ती गुलजार साहब से। हमदोनों किसी रेस्तरां में बैठकर बातें कर रहे थे कि मेरी गरलफरेंड (I mean girlfriend) का फोन आ गया। मैंने बाद में बात करता हूँ कहकर फोन काट दिया। गुलजार साहब ने मुझे प्यारी सी डाँट लगा कर लगाकर कहा ममता और प्रेम को कभी भी इंतजार नहीं करवाना चाहिए। फिर उन्होंने अपनी मीठी तो नहीं परन्तु कर्णप्रिय आवाज में कुछ अपनी नज्में सुनाई। नज्में तो भूल गया पर उनके सुनाने का लहजा अपूर्व ही कहा जा सकता है, एकदम हाथों को चमकाते हुए, आवाज में उस शेर की नूर थी। मजा आ गया सच में, उनकी गजलें ...

मधुश्रावणी

Image
#किस्से_छुटपन_के                           ★ मधुश्रावणी ★ नवविवाहित युगल के लिए मनाया जाने वाला यह त्योहार विशेष रूप से ब्राह्मण एवं कायस्थ में प्रचलित है। इसे नवविवाहित दुल्हनें अपने मायके में मनाती हैं। हमलोगों के यहाँ इसे मनाया तो नहीं जाता है लेकिन हमलोग इसके भुक्तभोगी जरूर होते हैं । दुल्हनें अपनी सहेलियों और छोटी बहनों के साथ गाँव में घूम-घूम कर फूल इकठ्ठा करती हैं। मेरी माँ और चाची भगवान को चढ़ाए गए प्रसाद की फोटो  सहित अधिकांश महिलाओं को यह बात असह्य है कि कोई उनके संतान से थोड़े ही कम प्रिय, फूलों के पौधों पर अत्याचार करे। चूँकि वे लड़कियाँ फूल तोड़ती ही नहीं बल्कि नोंच लेती हैं तो उजाड़िन कही जाती हैं। जब हम नैना-भुटका (बच्चे) हुआ करते थे तो माँ और चाची हमें दरवाजे पर तैनात कर देती थी। मेरे सभी सहपाठियों की कमोबेश यही स्थिति थी कि विद्यालय से लौटे तो खाना खिलाकर दरवाजे तैनात करवा दिया। इस हिदायत के साथ कि सुरक्षा व्यवस्था छोड़कर अगर खेलने भागे तो रात का खाना गया।  पूजन सामाग्रियों की ...